Sunday, March 29, 2015

नर पिशाच

ऐ ज़िंदगी तूने दामन में 

क्या छुपा रखा है ? 

खुशियाँ तो नज़र आती नहीँ , 

तूने दर्द से आँचल भरा है l 

रात अँधेरी बहुत ही अँधेरी . . . 

गहरे घने बादलों ने 

जम कर आँसु बहाए हैं ; और भीगी - भीगी पलकों में 

सारे जा समाये हैं 

ऐ ज़िंदगी , अब तो तू 

कोई उमीद ना रख 

इंसानों की इस दुनियाँ में

नर पिशाच कहाँ से आए हैं

जो इंसानियत को ही शर्माए है . . . 

#kiren babal

30. 3. 2015

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