This is a tribute to my father on his fourth death anniversary .
Accidently called Ranchi toknow his welfare and learnt that despite ill health , he had gone to the bank to deposit some amount in my account . A reply (in Punjabi) to mild reprimand from a daughter. . . His last words
मेरी जान
ये थे वो आखिरी शब्द - -
"तँू ताँ मेरी जान ए
मेरे दिल विच वसदी येंl "
कुछ थके थके से
दर्द से भरे हुए l
मेरी आँखों से आँसू
बहे जा रहे थे ,
मगर आवाज़ मॆं लरज़ ना आऐ
हंस कर दिलासे दे रही थी - - - -
"आप ठीक हो जाओगे पापा
मगर आप बाहर क्यों गये
आराम करते ? "
उधर से थकी सी आवाज़ आई - - -
"मेरा जी कित्ता , पुत्तर जी
दस कुज गलत कित्ता ?
तूँ ताँ मेरी जान ए
मेरे दिल विच वसदी यें l
थोड़ा आराम करांं गा
ते ठीक हो जावांगा ! "
यॆ नहीँ मालूम था कि
आराम कि चिर निद्रा में सो जाएँगे ,
हमें अपनी यादों के सहारे छोड़ जाएँगे l
पर हर रोज़ रात को यह
अमर वेल सा गीत मेरे कानों में गूँजता है - - - -
"तूँ ताँ मेरी जान ए
मेरे दिल विच वसदी यें "
#Kiren Babal
2. 03. 2015
Accidently called Ranchi toknow his welfare and learnt that despite ill health , he had gone to the bank to deposit some amount in my account . A reply (in Punjabi) to mild reprimand from a daughter. . . His last words
मेरी जान
ये थे वो आखिरी शब्द - -
"तँू ताँ मेरी जान ए
मेरे दिल विच वसदी येंl "
कुछ थके थके से
दर्द से भरे हुए l
मेरी आँखों से आँसू
बहे जा रहे थे ,
मगर आवाज़ मॆं लरज़ ना आऐ
हंस कर दिलासे दे रही थी - - - -
"आप ठीक हो जाओगे पापा
मगर आप बाहर क्यों गये
आराम करते ? "
उधर से थकी सी आवाज़ आई - - -
"मेरा जी कित्ता , पुत्तर जी
दस कुज गलत कित्ता ?
तूँ ताँ मेरी जान ए
मेरे दिल विच वसदी यें l
थोड़ा आराम करांं गा
ते ठीक हो जावांगा ! "
यॆ नहीँ मालूम था कि
आराम कि चिर निद्रा में सो जाएँगे ,
हमें अपनी यादों के सहारे छोड़ जाएँगे l
पर हर रोज़ रात को यह
अमर वेल सा गीत मेरे कानों में गूँजता है - - - -
"तूँ ताँ मेरी जान ए
मेरे दिल विच वसदी यें "
#Kiren Babal
2. 03. 2015
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