Saturday, March 21, 2015

मेरा वजूद



हर रात के बाद की

इक नई सुबह हूँ मैं l 

हर बारिश के बाद की 

नई सोंधी खुशबू हूँ मैं l 

बंद आँखों में संजोए , हर ख्वाब 

का तस्सवुर हूँ मैं l 

आस्मां में लुत्फ उठाते परिन्दे 

का पुरजोर जोश हूँ मैं l 

हर रंजो ग़म से गुज़र कर 

होठों पर बसी इक हँसी हूँ मैं l 

तूफानों को चीर कर 

आशा की नई किरण हूँ मैं l 

छोटे छोटे लम्हों में 

अपने हिस्से की ढूँढ़ती , खुशी हूँ मैं l 

खुदा की बनाई इस कायनात में 

खुदा के नूर का ही अंश हूँ मैं l 

# Kiren Babal
20. 3. 2015

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