हर रात के बाद की
इक नई सुबह हूँ मैं l
हर बारिश के बाद की
नई सोंधी खुशबू हूँ मैं l
बंद आँखों में संजोए , हर ख्वाब
का तस्सवुर हूँ मैं l
आस्मां में लुत्फ उठाते परिन्दे
का पुरजोर जोश हूँ मैं l
हर रंजो ग़म से गुज़र कर
होठों पर बसी इक हँसी हूँ मैं l
तूफानों को चीर कर
आशा की नई किरण हूँ मैं l
छोटे छोटे लम्हों में
अपने हिस्से की ढूँढ़ती , खुशी हूँ मैं l
खुदा की बनाई इस कायनात में
खुदा के नूर का ही अंश हूँ मैं l
# Kiren Babal
20. 3. 2015
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