Thursday, July 12, 2012

मौत के साऐ


तेरा वो बचपन
हँसता खेलता बचपन
धीरे धीरे बढ़ता बचपन
जवानी में बदलता
तेरा वो बचपन|
देखा तो मैंने ---------         
तेरा वो सारा बचपन|
--नहीं देखा तो सिर्फ़
मौत के साऐ में घिरता
तुझे और तेरा वजूद
--नहीं देखी तो तेरी
वो अनकही ,अनसुनी फरियादें
मौत से गिड़गिड़ाती
तेरी सिसकियाँ |


ख्वाबों में तो तुम आते हो
हमेशा से अपनी शरारत लिए हुए
मगर जिंदगी से रूख्सत हुए
हमें रुला-रूला के||

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