तेरा वो बचपन
हँसता खेलता बचपन
धीरे धीरे बढ़ता बचपन
जवानी में बदलता
तेरा वो बचपन|
देखा
तो मैंने ---------
तेरा वो सारा बचपन|
--नहीं देखा तो सिर्फ़
मौत के साऐ में घिरता
तुझे और तेरा वजूद
--नहीं देखी तो तेरी
वो अनकही ,अनसुनी फरियादें
मौत से गिड़गिड़ाती
तेरी सिसकियाँ |
ख्वाबों में तो तुम
आते हो
हमेशा से अपनी शरारत
लिए हुए
मगर जिंदगी से रूख्सत
हुए
हमें रुला-रूला के||
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