हिन्दी कविताएँ : दीदारे दिल
दिल की दुनिया --- कितनी आबाद...कितनी बरबाद |
Wednesday, July 4, 2012
सवाल
दिल
की
रही
दिल
में
तुम्हें
सुनाएँ
भी
तो
कैसे|
दामन आंसुओ से भीगा है
तुम्हें दिखाएँ भी तो कैसे|
अश्क
पलकों
पे
अटके
हैं
वो
छलकें
भी
तो
कैसे |
फूल
तो
मुरझाए
पड़े
हैं
बहार
आए
भी
तो
कैसे
|
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment