हिन्दी कविताएँ : दीदारे दिल
दिल की दुनिया --- कितनी आबाद...कितनी बरबाद |
Thursday, July 12, 2012
तन्हाई
मेरी तन्हाई से तुम्हें सुकून मिले
तो सर आखों पर|
हमें तो यूँ भी आद्त है तन्हा रहने की|
पलभर की खुशी जब भी मिली तुमसे
महसूस यही होता रहा कि
बहुत महंगी पड़ेगी मुझे|
कतरा कतरा हंसी की कीमत
यूँ आँसुओं से चुकेगी
ये मालूम न था|
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment