हिन्दी कविताएँ : दीदारे दिल
दिल की दुनिया --- कितनी आबाद...कितनी बरबाद |
Wednesday, July 4, 2012
मेरे अपने
मैं
हूँ
कौन
पूछा
मुझसे
मेरे
अपनों
ने
|
बेआवाज
रहूँ
मैं
सदा
कहा
मुझसे
मेरे
अपनों
ने
|
ज़ाहिर
करूँ
ना
कोई
अरमां
कहा
मुझसे
मेरे
अपनों
ने
|
और
डर
ने
कहा
----
मैं, रहूँ सदा तेरे मन में |
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