कल लाल बत्ती पर,
लम्बी कतार की वजह
गाड़ी रू क गई मेरी
और इंजन बंद कर दिया ।
नज़रे उठा कर इधर उधर देखने लगी;
एक फर्लांग के अन्तराल पर खड़ेे दो वृक्षों को छूकर
बिजली की तार गुजर रही थी,
जिसपर मेरी नज़र जा टिकी थी,
बात ही कुछ ऐसी थी।
इक नन्ही गिलहरी,
किसी नटी से कम नहीं
पूँछ को उपर उठाए
नपे तुल ,
सधे हुए
कुछ काँपते,
लरजते
कदमों से
आगे बढ़ रही थी ।
और दिल थामे, मैं
एक टक उसे देख रही थी।
" ध्यान से. ..
देख के...
नन्ही गिलहरी "
मन का डर,
जुबाँ पर आ ही गया
कहीं बिचारी गिर ना पड़े
बिजली कीे तार से ।
वो गिलहरी,
थोड़ा भागती - थोड़ा रुकती
थोड़ा भागती -थोड़ा रूकती,
अपनी मंजिल की ओर
पूरी तन्मयता से
बढ़ी जा रही थी।
पेड़ को पास देख
इक लम्बी छलांग लगाकर
उपरी पतली टहनियों में झूल गई
और पत्तियों के झुरमुट में खो गई।
मुझे लगा जैसे मेरी सांस ही रूक गई
अचानक पीछे से जोर का हार्न बजा
मेरी तन्द्रा टूटी, हरी बत्ती हो चुकी थी,
झट से गाड़ी स्टार्ट कर आगे बढ़ गई।
मन में एक असीम, अनजानी
खुशी की लहर लिए हुए।
तभी रेडियो पर यह गीत बज उठा,
'हिम्मत करने वालों की कभी हार नहीं होती'।
Kiren Babal
17.6.2015
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