Monday, July 13, 2015

बारिश


बदरा तुम घिर आओ,
यूँ हमको ना तरसा,
जीवन की हरियाली है तुमसे,
महकी है धरती माँ तुझसे,
फिर वही फुहारें बरसाओ,
बदरा तुम घिर आओ।
बच्चों की किलकारी हो तुम,
बूढ़ों की जवानी हो तुम,
फिर बचपन की याद दिलाओ,
बदरा तुम घिर आओ ।

ऐसे बरसो छम छमा छम
थिरक उठें बस, सब के मन,
ना कोई रोके , ना कोई टोके,
जंगल थिरके, घर आंगन थिरके,
दे कर थाप--छमा छम, छम छम।
कारे बदरा तुम क्या जानो
सावन के झूले, तब तक ना भाए
संग तुम्हारा हो ना जब तक।
Kiren Babal
19.6.2015

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